‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ पड़ सकती है भारी, जानिए वास्तव ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की वास्तविक लागत क्या होती है? What is the actual cost of No Cost EMI you pay

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Actual cost of No Cost EMI

‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ पड़ सकती है भारी, जानिए वास्तव ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की वास्तविक लागत क्या होती है? What is the actual cost of No Cost EMI you pay

‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ पड़ सकती है भारी, जानिए वास्तव ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की वास्तविक लागत क्या होती है? What is the actual cost of No Cost EMI you pay – इन त्योहारों के मौसम में हर कोई बढ़ चढ़कर खरीददारी कर रहा है, कई बार कुछ बड़े उत्पाद हम उनकी कीमत को जान कर लेने से बचते है, लेकिन जब से प्रोडक्ट्स पर लोन होना शुरू हो गया है, आम आदमी के लिए बड़े सामान लेना सरल हो गया है।

इन्ही लोन के साथ आजकल बाज़ार में ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ का काफी चलन बढ़ गया है! किन्तु क्या आप ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की वास्तविक जानते है, अगर नही तो आज के इस लेख में हम इसी पर चर्चा करने वाले है, तो बने रहिये हमारे साथ आर्टिकल के अंत तक –

क्या है ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ (What is No Cost EMI or Zero Cost EMI)

अगर आप कोई बड़ा सामान खरीदते है और समय अगर उस प्रोडक्ट पर ईएमआई मिल जाती है तो aएप बड़े अमाउंट या कहे भारी लागत का अग्रिम भुगतान करने का बोझ दूर हो जाता है, किन्तु क्या आप जानते है इन ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ योजनाओं पर हमेशा एक लागत छुपी हुई होती है।

देखा जाये तो ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ एक छलावे की तरह है, जिसमे ग्राहक से लिया जाने वाला ब्याज ईएमआई की राशि में ही जुड़ा हुआ होता है, किन्तु वो डायरेक्ट कस्टमर को शो नही हो, इसीलिए उत्पाद की कीमतों का ब्रेक-उप ऐसा बनाया जाता है कि वो स्पष्ट रूप से पता न चले ।

त्योहारों के मौसम की शुरुआत के साथ, कई ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल विक्रेता मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों आदि जैसे उत्पादों पर ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ या ‘जीरो कॉस्ट ईएमआई’ (‘No-cost EMI’ or ‘Zero Cost EMI’) की स्कीम लांच करते हैं।

ये बात तो एकदम सही है कि समान मासिक किस्तों (ईएमआई) पर उत्पाद खरीदते समय भारी लागत का अग्रिम भुगतान करने का बोझ दूर हो जाता है। लेकिन हमे ये याद रखना चाहिए कि इन ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ योजनाओं पर हमेशा एक लागत छुपी हुई होती है। इसलिए, ऐसी ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’/’जीरो-कॉस्ट ईएमआई’ योजनाओं की वास्तविक लागत जानना महत्वपूर्ण है।

“अधिकांश ऑफ़लाइन और ऑनलाइन रिटेल विक्रेता इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गैजेट आदि खरीदने के लिए कंस्यूमर ड्यूरेबल लोन की पेशकश करने वाले कुछ वित्तीय संस्थानों के साथ टाई-उप करते हैं। इन स्कीमो को ‘शून्य लागत ऋण/zero cost loans’ के रूप में इनकी मार्केटिंग की जाती है, लेकिन ऐसे लोन्स पर वास्तविक ब्याज दर आमतौर पर 16 प्रतिशत से 24 प्रतिशत के बीच होती है जो कि बहुत अधिक होती है।”

कानून क्या कहता है? (What does the law say?)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2013 में अपने सर्कुलर में कहा है कि शून्य प्रतिशत ब्याज (zero per cent interest) की अवधारणा अस्तित्वहीन है। 17 सितंबर, 2013 के सर्कुलर में कहा गया है, “क्रेडिट कार्ड बकाया पर दी जाने वाली शून्य प्रतिशत ईएमआई योजनाओं में, ब्याज तत्व को अक्सर छिपाया जाता है और प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में इसे ग्राहक के ऊपर लगा दिया जाता है।

इसी तरह, कुछ बैंक इस लोन पर किए गए खर्चों (लोन की सोर्सिंग करने वाले DSA का कमीशन) ) को लगाए गए ब्याज की लागू दर (ROI) इसमें ही जोड़ देते है। चूंकि शून्य प्रतिशत ब्याज की अवधारणा ही अस्तित्वहीन है और उचित व्यवहार की मांग है कि प्रोसेसिंग चार्ज और आरओआई चार्ज को उत्पाद/सेगमेंट के हिसाब से सोर्सिंग चैनल के बावजूद एक समान रखा जाना चाहिए।

ऐसी योजनाएं केवल कमजोर ग्राहकों को लुभाने और उनका शोषण करने के उद्देश्य से काम करती हैं। एकमात्र कारक जो एक ही उत्पाद के लिए अलग अलग आरओआई को सही ठहरा सकता है, वह है, ग्राहक की जोखिम रेटिंग है, वैसे तो ये रिटेल उत्पादों के मामले में लागू नहीं होता है जहां आरओआई को आम तौर पर फ्लैट रखा जाता है।

योजना कैसे काम करती है? (How does the scheme work?)

जैसा कि केंद्रीय बैंक के सर्कुलर में कहा गया है, शून्य प्रतिशत ब्याज योजनाएं सिर्फ एक मार्केटिंग का नया तरीका हैं, जिसमे कि लगने वाला ब्याज लागत ग्राहकों के ऊपर डाल दी जाती है। गुप्ता बताते हैं कि ये योजनाएं दो तरह से काम करती हैं।

  • 1. ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म द्वारा अक्सर उपयोग किए जाने वाले तरीकों में से एक है कि वो जो भी छूट/डिस्काउंट आपको देने वाले थे वो इस प्रोडक्ट की ब्याज लागत को कवर करने के लिए बैंक या वित्तीय संस्थान को इस राशि का भुगतान कर देते है।
  • 2. दूसरा तरीका उत्पाद की कीमत में ब्याज लागत को जोड़ना है।

यहां देखें कि ये योजनाएं कैसे काम करती हैं।

जब छूट ब्याज के बराबर होती है (When a discount is equivalent to interest)

सबसे लोकप्रिय तरीका जिसके माध्यम से ऑनलाइन ई-टेलर्स ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ की पेशकश करते हैं, वह है भुगतान की जाने वाली ब्याज की कुल राशि के बराबर छूट देना।

मान लीजिए आप जिस फोन को खरीदना चाहते हैं उसकी कीमत 15,000 रुपये है। तीन महीने की ईएमआई योजना के तहत, ब्याज दर 15 प्रतिशत है और जिससे आपको 2,250 रुपये की ब्याज राशि का भुगतान करना होगा।

ऑनलाइन रिटेलर्स पर नो-कॉस्ट ईएमआई ऑफर/No-cost EMI’ offers on the online retailers

मोबाइल फ़ोन की कीमत Rs 15,000
दिया जाने वाला डिस्काउंट (Rs 2,250)
डिस्काउंट के बाद मोबाइल की कीमत Rs 12,750
ईएमआई के तहत भुगतान किया जाने वाला कुल ब्याज
(ईएमआई पर खरीद के मामले में)
Rs 2,250
आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली कुल राशि Rs 15,000

अनिवार्य रूप से, आप किश्तों में फोन की मूल कीमत का भुगतान करते हैं: रिटेल विक्रेता को डिस्काउंटेड मूल्य मिलता है और शेष राशि (यानी, ‘डिस्काउंट अमाउंट’) लोन पर ब्याज का भुगतान करने के लिए जाती है। दरअसल, आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली कुल कीमत रिटेल विक्रेता को भुगतान की गई कीमत और फाइनेंसर को दिए गए ब्याज में विभाजित हो जाती है। सिवाय इसके कि इस ब्रेक अप को पहले नहीं दिखाया जाता है। यदि आप रिटेल विक्रेता को फोन की पूरी कीमत का भुगतान करने की पेशकश करते हैं, तो आप 12,750 रुपये की डिस्काउंटेड कीमत पर फोन प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं।

इस प्रकार, जैसा कि आपने तीन महीने की ईएमआई योजना ली है, डिस्काउंट हटा कर और ब्याज लागत जोड़ने के बाद, आप तीन महीने के लिए 5,000 रुपये की ईएमआई का भुगतान करेंगे।

जब ब्याज राशि को उत्पाद की कीमत में जोड़ा जाता है (When the interest amount is added to the product price)

एक और तरीका है जिसमें ऐसी योजनाएं काम करती हैं, वह ऐसी है – उत्पाद की कीमत में ब्याज लागत जोड़कर।”

मान ले कि उत्पाद की कीमत 15,000 रुपये है। रिटेल विक्रेता आपको यह उत्पाद ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ योजना के तहत 17,250 रुपये में प्रदान करता है। यहां 2,250 रुपये का ब्याज पहले से ही आपके उत्पाद की लागत में जोड़ा गया हुआ है और जैसे ही आप ये प्रोडक्ट लोन पर ले कर अपने लोन को चुकाते हैं, तो ये कीमत आपके द्वारा भुगतान की जाती है।

उत्पाद की वास्तविक लागत Rs 15,000
ईएमआई पर खरीदते समय चुकाया जाने वाला ब्याज Rs 2,250
जीरो कॉस्ट ईएमआई स्कीम के तहत ऑफर प्राइस Rs 17,250
ईएमआई के माध्यम से आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली कुल लागत Rs 17,250

इसलिए, यदि आपने तीन महीने का ईएमआई प्लान लिया है, तो आपके द्वारा देय राशि 5,750 रुपये होगी।

वास्तव में, ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ एक मिथ्या नाम है क्योंकि लोन पर लागत या ब्याज ईएमआई में अंतर्निहित होता है, सिवाय इसके कि ब्रेक अप खरीदार को स्पष्ट रूप से दिखाई न दे। यदि आप डील के नियमों और शर्तों को गहराई से देखें तो आपको विवरण मिल सकता है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

आज के लेख में हमने जाना कि ,नो-कॉस्ट ईएमआई’ की वास्तविक लागत क्या होती है? (What is the actual cost of No-cost EMI you pay), अगर इसके बाद भी अगर आपके मन में कोई सवाल है तो मेरे कमेंट बॉक्स में आकर पूछे मैं आपके सवालों का जवाब अवश्य देंगे, तब तक के लिए बने रहिये हमारे साथ apneebachat.com पर! मिलते हैं अगले आर्टिकल में धन्यवाद।